Video Description: प्रश्न : जगत है ही नहीं इसका अनुभव आत्मा को होता है या अहंकार को होता है ?
पूज्य बापूजी : जगत है ही नहीं ..जैसे स्वप्न दिख रहा है उस समय स्वप्न है ये जगत नहीं है ऐसा नहीं लगता , जब स्वप्ने से उठते हैं तब लगता है की स्वप्ने का जगत नहीं है , ऐसे ही अपने आत्मदेव में ठीक से जागते हैं तो फिर जगत की सत्यता नहीं दिखती , तो बोले जगत नहीं है ...जो सदा है उसमे स्थिति कर के समझाने के लिए बोला जाता है की जगत नहीं है |
एक होती है व्यवहारिक सत्ता दूसरी होती है प्रातिभासिक सत्ता और तीसरी होती है वास्तविक सत्ता जैसे आप हम अभी बैठे हैं ये है व्यवहारिक सत्ता अब जगत नहीं तो बापूजी क्यों बोलते हो ...सत्संग में क्या आ रहे हैं नहीं कैसे है ? तो व्यावहारिक सत्ता में जगत है ....